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गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

चंद मिसरे पेश ए ख़िदमत है

ख़ुदा हाफ़िज़ ओ नासिर 
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ऐ आबिद ए बीमार  ख़ुदा हाफ़िज़ ओ नासिर
ऐ बेकस ओ ग़मख़्वार ख़ुदा हाफ़िज़ ओ नासिर
ऐ क़ाफ़िला सालार ख़ुदा हाफ़िज़ ओ नासिर
ऐ सब्र के मे’यार ख़ुदा हाफ़िज़ ओ नासिर


है ज़ब्त की ये कौन सी मंज़िल मेरे मौला

बाक़ी हैं अभी कितने मराहिल मेरे मौला

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