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शनिवार, 9 जनवरी 2010

सलाम 
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मुस्लिमे ज़ीशान तेरी हर रेफाक़त को सलाम 
तेरे फ़ह्मो फ़िक्र में पिन्हाँ सदाक़त को सलाम 


बेअदब जो थी ज़ईफा हो गयी बीमार जब
की ख़बर गीरी मुहम्मद ,इस अयादत को सलाम 


मुफ़लिस ओ नादार को गंदुम की दे कर बोरियां 
ख़ुद किया फ़ाक़ा अली ,ऐसी केफालत को सलाम 


मुस्कुरा कर फ़तह की बेशीर ने जंगे अज़ीम 
काएदे तिफ्लाने आलम की क़यादत को सलाम 


ज़ुल्जनाहे शाह अस्पे बावफा तेरा ख़ुलूस
तू भी प्यासा ही रहा ,तेरी एआनत  को सलाम 


मुनहमिक सजदों में शह अहबाब थे सीना सिपर 
जाँ निसाराने शहे दीं की इबादत को सलाम 


रोक ली शब्बीर ने तलवार जब आई नेदा 
ऐ मुजाहिद तेरे इस सब्रो क़ेना अत को सलाम 


खानदाने हैदरी में हर कोई जर्रार था 
कर्बला वाले शहीदों की शहादत को सलाम 


अपने क़ातिल की बंधी मुश्कों को खुलवाकर 'शेफ़ा'
दे दिया इंसाफ़ को  मानी इमामत को सलाम 
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16 टिप्‍पणियां:

  1. बहन,
    उर्दू-अरबी के कठिन शब्दों की अपनी कमअक्ली के बावजूद तुम्हारी इन पंक्तियों का मर्म मन को गहरे छूता है ! मर्मस्पर्शी बयान को मेरा भी सलाम पहुंचे !
    भैया.

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  2. मोहतरमा इस्मत साहिबा, आदाब
    सुबहान अल्लाह
    मुस्लिमे ज़ीशान तेरी हर रेफाक़त को सलाम
    तेरे फ़ह्मो फ़िक्र में पिन्हाँ सदाक़त को सलाम

    बेअदब जो थी ज़ईफा हो गयी बीमार जब
    की ख़बर गीरी मुहम्मद ,इस अयादत को सलाम

    हर मिसरा जैसे पाक इबादत का जज्बा पैदा कर रहा है
    अल्लाह ने ये अलग ही हुनर बख्शा है आपको
    जो सबके पास नहीं, हमारे लिये भी दुआ कीजिये
    कि ऐसा कुछ कहने के लायक हो सकें
    शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

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  3. खानदाने हैदरी में हर कोई जर्रार था
    कर्बला वाले शहीदों की शहादत को सलाम

    पूरा वाकया जिस खूबसूरती और अदब के साथ तुमने पेश किया है, वो काबिलेदाद है. जानती हूं यहां तुम्हें दाद लेने की ख्वाहिश नहीं है, हम भी बस पढें और समझें, इतना ही काफ़ी है.

    खानदाने हैदरी में हर कोई जर्रार था
    कर्बला वाले शहीदों की शहादत को सलाम
    सलाम.

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  4. anand bhaiya ,vandanaji aurshahid sahab
    mujhe khushi hai ki is blog par aye ap log .aplogon ka aashirvad rahega to koshish nhi jari rahegi ,inshaallah

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  5. Itne khoobsoorat asharon se ru-b-ru jisne karaya us Ismat ko salam!

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  6. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.......

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  7. पहली बार आपको पढ़ा है , गज़ब का लिखती हो ! ईश्वर करे यह चिराग हमेशा इसी तरह रोशन रहे ! हार्दिक शुभकामनायें !

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  8. हो सके तो कठिन शब्दों का हिंदी अनुवाद दे दिया करो तो मेरे जैसे कम पढ़े लिखे लोग पूरा आनंद ले पाएंगे !!
    PS: please remove word verification , gives lot of inconvenience.

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  9. खानदाने हैदरी में हर कोई जर्रार था

    कर्बला वाले शहीदों की शहादत को सलाम




    अपने क़ातिल की बंधी मुश्कों को खुलवाकर 'शेफ़ा'

    दे दिया इंसाफ़ को मानी इमामत को सलाम
    kya gajab ka likhti ho ,tumahre kalam ko hi salaam ,shahid ji ki baat shat -pratishat sach hai ,ab tumhe jod li hoon jisse nai post ki khabar milti rahegi .

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  10. masha-allah bahut khoob!! kya naam chuna hai aapne siraate-mustaqeem allah ham sabhi ko is raaste par chalaaye aameen.

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  11. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,
    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,
    कलम के पुजारी अगर सो गये तो
    ये धन के पुजारी
    वतन बेंच देगें।
    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

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  12. आप सभी लोगों का बहुत बहुत शुक्रिया कि आप लोग यहां तशरीफ़ लाए ,सतीश जी अब कोशिश करूंगी कि कुछ अल्फ़ाज़ के मानी भी लिख सकूं .तालिब साहब दुआओं का शुक्रिया.
    विप्लव जी बहुत बहुत धन्यवाद कि जनोक्ति द्वारा इस रच्ना का स्वागत किया गया

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  13. इस नए चिट्ठे के साथ आपको हिंदी चिट्ठा जगत में आपको देखकर खुशी हुई .. सफलता के लिए बहुत शुभकामनाएं !!

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