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शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2011

ek sher

एक शेर 
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इन्तहा ज़ुल्म की जब होगी 'शेफ़ा' दुनिया में 
देगा इंसाफ़ मेरे रब की अदालत का निज़ाम

3 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है!! बहुत खूब शेर कहा है इस्मत तुमने. एकदम सच्ची बात.

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  2. इन्तहा ज़ुल्म की जब होगी 'शेफ़ा' दुनिया में
    देगा इंसाफ़ मेरे रब की अदालत का निज़ाम...
    बहुत खूब...मुबारकबाद.

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