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शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2010

नात ए शरीफ़

एक ना’त ए शरीफ़ पेशे ख़िदमत है ,अगर आप को पुर असर मह्सूस हो तो दुआओं से नवाज़ कर शुक्र गुज़ार होने का मौक़ा अता फ़रमाएं
.
ना’त ए शरीफ़
_________________________
मेरे मौला तू बुला मुझ को कि दर देख सके 
ये गुनह्गार मुहम्मद का नगर देख सके

मुस्तफ़ा ख़ुल्क़ का हामी,है अमीनों का अमीं
तेरा हर राज़ अमानत ,तू अगर देख सके.

वो तो है नूर हर इक चश्म की ज़द से बाहर
जिस्म हासिल था उसे ,ताकि बशर देख सके

अपनी  उम्मत के लिये जिस ने दुआएं की थीं
और ये कोशिश थी उसे शीर ओ शकर देख सके 

न अदावत ,न शक़ावत , न रेज़ालत होगी 
तेरा किरदार जो दुनिया की नज़र देख सके 
-_____________________________________________
ख़ुल्क़ =अच्छा व्यवहार ; हामी = मानने वाला ; अमीन =अमानत रखने वाला,ईमानदार;
ज़द =लक्ष्य ;अदावत =दुशमनी ; शक़ावत =ज़ुल्म ; रेज़ालत =नीचता(व्यवहार की )




20 टिप्‍पणियां:

  1. मोहतरमा इस्मत साहिबा, आदाब
    सुबहान अल्लाह....
    हर शेर लाजवाब.....
    और.......
    वो तो है नूर हर इक चश्म की ज़द से बाहर
    जिस्म हासिल था उसे ,ताकि बशर देख सके.
    .....नायाब शेर...
    खालिक को इस गुनाहगार का सलाम.
    ..........
    न अदावत ,न शक़ावत , न रेज़ालत होगी
    तेरा किरदार जो दुनिया की नज़र देख सके ...
    बेशक......
    अपने जिस्म पर पत्थर खाकर
    दुनिया को यही पैग़ाम दिया है रसूल अल्लाह ने...
    मुबारकबाद

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  2. मेरे मौला तू बुला मुझ को कि दर देख सके
    ये गुनह्गार मुहम्मद का नगर देख सके
    Kya likhtee hain aap...harek sher ekse badhke ek hai!

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  3. bahut hi umda .aur purkashish andaaz..subhaanallah.mauqa mile to rachna-sansaar par seerat par hamaari post padhen.

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  4. वो तो है नूर हर इक चश्म की ज़द से बाहर
    जिस्म हासिल था उसे ,ताकि बशर देख सके
    क्या कहूं इन पंक्तियों पर!! हतवाक हूं, नि:शब्द भी...कैसे इतना सटीक और पुरअसर लिख लेती हो!!

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  5. वो तो है नूर हर इक चश्म की ज़द से बाहर
    जिस्म हासिल था उसे, ताकि बशर देख सके।
    कितना सटीक जवाब तलाशा है आपने एक शाश्‍वत प्रश्‍न का।
    दिली मुबारकबाद।

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  6. shukria,
    seerate-m. ke lye kya kahun ?naate-shrif ke liye kya kahun? huzur aur allah ke mutalliq kuch kahena?
    bezubaan hoon ,belafz ho gayi hoon.bas sabse ye raazi rahein ,aameen.

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  7. शाहिद जी ने इस ब्लाग पर पहुँचा कर मेरे दिल की मुराद पूरी कर दी। उर्दू सीखने की कोशिश शुरू की है मगर मुश्किल लग रहा है लिखना पढना तो कुछ कुछ आने लगा है
    वो भी कायदा तक। यहाँ उर्दू शब्दों की अर्था दे कर उनका प्रयोग समझने मे मदद मिलेगी
    गज़ल अभी सीखनी शुब्रू की है इस उस्तादना गज़ल पर क्या कह सकती हूँ? मेरे लिये तो हर शेर लाजवाब है। धन्यवाद और शुभकामनायें

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  8. मेरे मौला तू बुला मुझ को कि दर देख सके
    ये गुनह्गार मुहम्मद का नगर देख सके
    bahut khoob ,laazwaab likhti hoon hum to dang rah jaate padhkar .

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  9. मेरे मौला तू बुला मुझ को कि दर देख सके
    ये गुनह्गार मुहम्मद का नगर देख सके

    वो तो है नूर हर इक चश्म की ज़द से बाहर
    जिस्म हासिल था उसे ,ताकि बशर देख सके

    न अदावत ,न शक़ावत , न रेज़ालत होगी
    तेरा किरदार जो दुनिया की नज़र देख सके

    कुछ चीज़े ऐसी होती है जिनके कह देने के बाद कुछ कहा नहीं जाता ....


    सुभान्अल्लाह.....

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  10. वो तो है नूर हर इक चश्म की ज़द से बाहर
    जिस्म हासिल था उसे ,ताकि बशर देख सके-
    wah kya bat hai ismat sahiba!
    -iss noor ko bhi uss us noor ke deedar ki tamanna hai.hyed kabhi hon dua kijiyega.

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  11. meri urdu achchi nahi par aapke sabdon ke arth se kafi madad mili ..bhaut ghubsurat likhte hain aap..
    mere blog par hoslaafjai ka bhaut shukriya.

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  12. कैसे तारीफ़ करूँ ,इक अजब सी रूहानियत से भर दिया मुझको ....मैं नहीं जानती वो भाषा फिर भी तेरे अलापों का असर देख सके |

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  13. आप सब लोगों का बहुत बहुत शुक्रिया कि
    आप हज़रात इस ब्लॉग पर तशरीफ़ लाए
    और मेरी हौसला अफज़ाई की

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  14. न अदावत ,न शक़ावत , न रेज़ालत होगी
    तेरा किरदार जो दुनिया की नज़र देख सके
    Mai kuchh kahneke qabil nahi!Bas ek lafz...wah!

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  15. न अदावत ,न शक़ावत , न रेज़ालत होगी
    तेरा किरदार जो दुनिया की नज़र देख सके
    बेमिसाल, हर शेर काबिले तारीफ़ और वज़नदार. दाद कुबूल करें
    क्या लेखन कला है ?कमाल है

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  16. bahut hi sundar.. lafjon ka behtareen upyog.. me naya hoon kaafi kuch seekhne ko mil sakta hai aapki najmon se...

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  17. काबिलेतारीफ है प्रस्तुति।.सारी रचनाये आपकी बहुत ही अच्छी है|

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  18. न अदावत ,न शक़ावत , न रेज़ालत होगी
    तेरा किरदार जो दुनिया की नज़र देख सके ।
    इस्मत जी आप के शेर थोडे मुश्किल जरूर लगते हैं पर अर्थ से भरपूर होते हैं ।
    आप जो शब्दों के अर्थ देती हैं थोडे और दें ताकि हम जैसे कम जानने वाले भी समझ सकें ।
    जैसे उम्मत ,जद शीर और शकर शायद मीठे से ताल्लुक रखते हों पर आप बतायें) ।

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