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शुक्रवार, 11 दिसंबर 2009

क़सीदा
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ख़ल्क़ में मीज़ाने नुज़हत हैं अली ओ फ़ातेमा 
बेशक़ीमत दीं की दौलत हैं अली ओ फ़ातेमा 

जिन की अज़मत के थे क़ायल ख़ुद रसूलल्लाह भी 
मुस्तफ़ा की वो बेज़ा,अत हैं अली ओ फ़ातेमा 

दे सके दुनिया को जो दरसे अखूवत ,दरसे दीं 
"इन्तेखाबे चश्मे क़ुदरत हैं अली ओ फ़ातेमा "*

आ के साएल दर पे ख़ाली हाथ ना लौटा कभी 
दूरिये आज़ारे ग़ुरबत हैं अली ओ फ़ातेमा 


जौ की सूखी रोटियां और आब थी उन की गेज़ा
मा'आनिये सब्रो क़ेना'अत हैं अली ओ फ़ातेमा 


ज़ुल्म सारे सह लिए ईमान पर क़ायम रहे 
बानिये किरदार ओ इस्मत हैं अली ओ फ़ातेमा 


बेकसो,लाचारो ,बेबस ,बेनवा के वास्ते
मुश्किलों में अब्रे रहमत हैं अली ओ फ़ातेमा 


उन का दर सब के लिए है हो वो सुल्तां या फ़क़ीर
वक्ते हाजत दस्ते शफ़क़त हैं अली ओ फ़ातेमा 

पेश की ऐसे मसावात ओ अखूवत की मिसाल 
इस जहाँ में वजहे उल्फ़त है अली ओ फ़ातेमा 


ज़िन्दगी में जब कोई मुश्किल पड़ी मुझ पर 'शेफ़ा'
मेरे सहमे दिल की ताक़त हैं अली ओ फ़ातेमा

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*  ये  मिसरा है  मेरा नहीं है बल्कि  ये तरह दी गयी 
थी .



 


11 टिप्‍पणियां:

  1. अरे इस्मत जी ,अगर आप ऎसी मुश्किल भाषा लिखेंगी तो मेरे जैसे अदब के रसिया पर तो वही कहावत लागू होगी कि -----काला अक्षर भैंस बराबर

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  2. ज़िन्दगी में जब कोई मुश्किल पड़ी मुझ पर 'शेफ़ा'
    मेरे सहमे दिल की ताक़त हैं अली ओ फ़ातेमा
    बहुत खूब. सच है कमज़ोर क्षणों में परवरदिगार ही ताकत देता है.

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  3. aap sab ka is blog par aane ke liye shukriya .
    alka ji ye qaseeda misrae tarah par likha gaya hai aur jahan padha gaya wahan sab se aasan zaban yehi thi ,aap ne shayad mera doosra blog nahin dekha .

    arshia aap ka jawab us blog par hai .

    shukriya vandana,main ne is par arth nahin diye agli baar de doongi .

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  4. सुबहान अल्लाह,
    इस्मत साहिबा,
    ज़ुल्म सारे सह लिए ईमान पर क़ायम रहे
    बानिये किरदार ओ इस्मत हैं अली ओ फ़ातेमा
    पेश की ऐसे मसावात ओ अखूवत की मिसाल
    इस जहाँ में वजहे उल्फ़त है अली ओ फ़ातेमा

    बेशकीमती है ये ब्लाग,
    यहां आकर गुनाहों के अंधेरे में जिन्दगी गुजारने वालों के
    किरदार भी रोशन हो जायेंगे...
    इन्शा अल्लाह
    शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

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  5. bahut bahut shkriya shahid sahab ek sher arz hai--------

    main aasi hoon magar duniya ki toone nematen bakhsheen

    kahan se laoon shukraane ke main alfaz ai maula

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  6. ज़िन्दगी में जब कोई मुश्किल पड़ी मुझ पर 'शेफ़ा'
    मेरे सहमे दिल की ताक़त हैं अली ओ फ़ातेमा
    mere liye to yah satya hai kyonki use maine kai baar anubhav kiya

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